सही होकर भी, मैं अब गलत ही सही । सच की कद्र देकर भी, मैं झूठ का मुखौटा ही सही । वक्त सबको देकर भी, मैं बेबाक बेवक्त ही सही । ईमान देकर खुद को भी, मैं चोर बेईमान ही सही । रिश्ते दिल से निभाकर भी , मैं बेकार , गद्दार ही सही । नहीं जताना किसी को , की मैं कितना तन्हा रही, मैं गलत हु ,अब गलत ही सह...Read more
"हर शख्स आज सुकू का तलब चाहता , कुछ न देकर सब कुछ चाहता, आज भ्रष्टाचार के रस्ते जाकर, कल सच्चाई की सफलता चाहता, औरों को जख्हम देकर, खुद पर मरहम चाहता , सज्जन की बुराइयां गिनवा कर , खुद के दुष्कर्मों पर पर्दा चाहता, अपनो को भी रुलाकर, खुद हर पल तरब चाहता , कुछ न देकर भी सब कुछ चाहता मुसीबत ग...Read more
अदब किया इस जग में सबका , ताउम्र ज़ख्म के सिवा कुछ न मिला मिला , जब अपनों की भी बातें दिल पर लगती, तब गैरो से उपेक्षाओं का भार मिला , नायाब किया खुद को सबसे, फिर तन्हाई का इंसान मिला, दिखावे की इस दुनिया में सच्चे प्यार का , एकलौता मैं मेहमान मिला दिल से उतर गया है ईमानदारी, सच्चाई और न्याय का भू...Read more
