सही होकर भी, मैं अब गलत ही सही । सच की कद्र देकर भी, मैं झूठ का मुखौटा ही सही । वक्त सबको देकर भी, मैं बेबाक बेवक्त ही सही । ईमान देकर खुद को भी, मैं चोर बेईमान ही सही । रिश्ते दिल से निभाकर भी , मैं बेकार , गद्दार ही सही । नहीं जताना किसी को , की मैं कितना तन्हा रही, मैं गलत हु ,अब गलत ही सही ।✨💞✨

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