मैं अभी, मैं नहीं हूँ, ख्वाब जिंदा हैं, पर किसी उम्मीद में नहीं हूँ। मुझे नहीं पता क्या महसूस करना है मुझे, कभी मैं बहुत खुश हूँ, तो कभी अपनी ही सुद में नहीं हूँ। सवालों से घेरे रखा हैं खुदको, कभी उलझन में हूँ, तो कभी उलझनों का हल हूँ। माना खुद से क्रोध में हूँ, दर्द में हूँ, पर रुकूंगी नहीं, इस विश्वास में हूँ। ।
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